एशियन गेम्स के पदकवीर सैनिकों का सम्मान, जनरल धीरज सेठ बोले- देश को इनकी उपलब्धियों पर रहेगा गर्व
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता सैन्य खिलाड़ियों को सम्मानित किया। नीरू ढांडा, दीपक पूनिया और गुलवीर सिंह ने साझा किए अपने अनुभव और भविष्य के लक्ष्य।

नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाले सेना के खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि देश उनकी उपलब्धियों को हमेशा याद रखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय सैन्य खिलाड़ी आने वाले वर्षों में और बेहतर प्रदर्शन करेंगे तथा ओलंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी देश का नाम रोशन करेंगे।
सेना प्रमुख ने खिलाड़ियों के जज्बे की सराहना की
खिलाड़ियों को सम्मानित करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने कहा कि उनके लिए यह बेहद खुशी का अवसर है। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सेना के अनुशासन, कड़ी मेहनत और देश के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया।
सेना प्रमुख के मुताबिक, जिस जज्बे के साथ भारतीय सेना देश की रक्षा करती है, उसी लगन और मेहनत से खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा साबित की है। उन्होंने कहा कि एशियाई स्तर और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं में पदक जीतना आसान नहीं है। खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।
नीरू ढांडा ने सफलता का श्रेय सेना के अनुशासन को दिया
एशियन गेम्स में शूटिंग के क्षेत्र में तीन पदक जीतने वाली नीरू ढांडा ने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना से मिले अनुशासन और प्रशिक्षण को दिया। उन्होंने बताया कि शूटिंग जैसे खेल में मानसिक शांति, एकाग्रता और दबाव के बीच सही निर्णय लेना बेहद जरूरी होता है।
नीरू के अनुसार, सेना में रहते हुए उन्होंने इन गुणों को विकसित किया है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कई वर्षों तक लगातार मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के लिए तीन पदक जीतना उनके योगदान का एक छोटा-सा हिस्सा है।
नीरू ने यह भी बताया कि सेना प्रमुख खिलाड़ियों को लगातार प्रोत्साहित करते हैं। वह खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने, खेल का आनंद लेने और देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
दीपक पूनिया का लक्ष्य ओलंपिक 2028 में गोल्ड मेडल
एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान दीपक पूनिया ने कहा कि एशियाई स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेना और पदक जीतना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि सेना प्रमुख से सम्मान मिलने के बाद उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा मिली है।
दीपक का अगला बड़ा लक्ष्य वर्ष 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है। उन्हें उम्मीद है कि सेना प्रमुख से मिला प्रोत्साहन उनकी तैयारियों में मददगार साबित होगा।
गुलवीर सिंह ने लोगों के आशीर्वाद को बताया अहम
एशियन गेम्स में तीन पदक जीतने वाले भारतीय एथलीट गुलवीर सिंह ने अपनी सफलता में देशवासियों की दुआओं और आशीर्वाद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की तैयारी में कोच की भूमिका बेहद अहम होती है और वह अपने कोच के निर्देशों का पालन करते हुए प्रदर्शन में सुधार करने पर ध्यान देते हैं।
गुलवीर के मुताबिक, सेना प्रमुख ने उन्हें आगामी ओलंपिक में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काफी प्रयास करती है। ऐसे में खिलाड़ियों की भी जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश और सेना का गौरव बढ़ाएं।
कमलजीत ने नियमित अभ्यास को बताया सफलता की कुंजी
शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाले कमलजीत ने सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और अनुशासन को जरूरी बताया। उनके मुताबिक, खेल में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नियमित प्रैक्टिस के साथ एकाग्रता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने खिलाड़ियों से उम्मीद जताई कि वे ओलंपिक 2028 में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करेंगे और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेंगे।
ओलंपिक 2028 पर भारतीय खिलाड़ियों की नजर
सेना प्रमुख द्वारा सैन्य खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाना उनके मनोबल को बढ़ाने वाला अवसर रहा। खिलाड़ियों ने भी भविष्य की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प व्यक्त किया। अब इन खिलाड़ियों की नजर ओलंपिक 2028 पर है, जहां वे अपनी मेहनत, अनुशासन और अनुभव के दम पर भारत के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करना चाहेंगे।
भारतीय सेना का सहयोग और खिलाड़ियों का समर्पण आने वाले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भारत के प्रदर्शन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



